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Wednesday, December 23, 2009

फिर देखेंगे हम लोग

हांजी बिलकुल सही पढ़ा आपने, बहुत जल्दी ही हम सब फिर से देखेंगे हम लोग...
आज की पीढ़ी को तो शायद पता ही नहीं होगा की ये हम लोग है किस बला का नाम लेकिन हम जैसे कुछ लोग जिन्हें घर में ठोडा सा साहित्यिक माहौल मिला है उनके मन में जरुर है "हम लोग" की यादें और  NDTV इंडिया के हम लोग में हम लोग के पात्र देख कर तो हम लोगों में हम लोग की यादें ताज़ा हो ही गयी है. दूरदर्शन जल्दी ही लाने वाला है हम लोग .
अब देखने वाली वैसे अभी बोले तो सोचने वाली बात ये होगी की बिना दादामुनि और मनोहर श्याम जोशी के हम लोगों को क्या "हम लोग" पसंद आएगा. वैसे अगर पुराने दर्शकों की बात करे तो मुझे लगता है वो लोग "छंद पाकैया..." की कमी जरुर महसूस करेंगे.
१९८४ में तो दर्शक हम लोग के चरित्रों को खुद से जुड़ा हुआ मानते थे अब पता नहीं आज की पीढ़ी खुद को जुड़ा हुआ पाएगी हम लोग से?  मुझे ऐसा लगता है की दूरदर्शन जो की आज भी देखा जाता है क्योंकि अभी DTH का उतना प्रचार प्रसार नहीं हुआ है गाँव में, को थोड़ी अपनी मार्केटिंग पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि जो दर्शक उनसे अलग हो गए है वो वापस आ सके. पहले दूरदर्शन को अपनी साख को वापस लाना चाहिए क्योंकि लोगों के मन में ये बात गहराई तक बैठ चुकी है की दूरदर्शन के दूर से ही दर्शन करो.
आप खुद ही सोचिये की अगर लापता गंज दूरदर्शन पर आ रहा होता तो वो कितने दर्शकों तक पहुँच पाता और कितने दर्शक बोलते "पापा कसम बहुत अच्छा प्रोग्राम है..." या "कभी कभी कुछ अच्छे प्रोग्राम्स भी बन जाते है ".